The Science of Getting Rich Book Summary in Hindi अमीर बनाने का विज्ञान

The Science of Getting Rich Book Summary in Hindi. लेखक बहुत ही गरीब घराने से थे, जब वे कॉलेज में थे तभी उन्होंने कुछ बिलेनियर का इंटरव्यू लेने का सोचा, सिर्फ यह जानने के लिए उन्होंने इंटरव्यू लेने के लिए सोचा कि ऐसी कौन सी चीज है जो एक इंसान को बिलेनियर बनाती है ।

कई सारे इंटरव्यू लेने के बाद उनको पता चला कि एक मिडिल क्लास और अमीर आदमी को क्या चीझ अलग करती है और जो सबसे ज्यादा मैटर भी करती है, वह होती है सिर्फ और सिर्फ उनकी सोच ।

एक बार एक आदमी को उसकी बीवी ने कुछ सामान लाने के लिए बोली और जो सामान जितना पैसा का था इतना उस पर्ची पर लिख दी कि यह चीज तुमको इतने पैसे में मिल जाएगी उसके बाद वह आदमी अपने घर के पास वाले ही दुकान पर जाता है पर वहां उसकी बीवी ने जितने पैसे में बताई थी उससे कुछ पैसा ज्यादा का सामान था, क्योंकि वह व्यक्ति कहीं दूर से अच्छी क्वालिटी के सामान ले आकर वहां बेच रहा होता है इसलिए रेट थोड़ा ज्यादा था ।

पर वह व्यक्ति रेट ज्यादा सुनकर वहां से चल देता है, वहां से चीजे नहीं खरीदता हैं उसके बाद थोड़ी दूर आगे वाली दुकान पर जाकर पूछता है तो वहां पर भी कुछ ऐसा ही होता है तब यह व्यक्ति स्कूटर लेकर अपने घर से कुछ किलोमीटर दूर जाता है जहां से एक्चुअली में उसके बीवी ने सामान लाने के लिए कहीं होती है क्योंकि वहां सारी चीजें थोड़ी सस्ती में मिलती है इसी वजह से सामान लेने के लिए वहां लोगों की लंबी लाइन लगती है और वह व्यक्ति भी जाकर उसी लाइन में खड़ा हो जाता है और उसकी बारी आते-आते लगभग आधा घंटा निकल जाता है उसके बाद फाइनली वह व्यक्ति सामान खरीद कर बड़े ही खुशी के साथ घर वापस आता है और प्राउड फील करते हुए अपने बीवी से बताता है कि कैसे उसने सस्ते में वह सामान खरीद कर कुछ सेविंग करी है।

The Science of Getting Rich Book Summary in Hindi अमीर बनाने का विज्ञान

और आप लोग यह बताइए कि यह व्यक्ति समझदार था या बुद्धू ज्यादातर मिडिल क्लास लोग इसे समझदार ही कहेंगे क्योंकि इसमें जो पैसे बचाएं हैं लेकिन एक रिचमाइंड सेट वाले इंसान को यह बुद्धू लगेगा क्योंकि जिसने कुछ पैसे बचाने के चक्कर में अपना एक घंटा वेस्ट किया क्योंकि जितने टाइम में उन्होंने जितना सेविंग की है उससे 100 गुना ज्यादा पैसा कमा लिया होता कुछ और ज्यादा वैल्यूएबल काम करके और यही माइंडसेट का डिफरेंट ही एक अमीर और गरीब इंसान को अलग करता है।

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मिडिल क्लास माइंड सेट वाले लोग हमेशा पैसा बचाने का सोचते हैं जबकि एक रिमाइंडर सेट वाला इंसान हमेशा पैसा कमाने के बारे में सोचता है। इस बात को आप गलत मत समझना, क्योंकि पैसा बचाना बहुत अच्छी बात है लेकिन हद से ज्यादा पैसा बचाने पर ही फोकस करना बहुत गलत बात है ।

The Science of Getting Rich Book Summary in Hindi

एक रिचमाइंडसेट वाला व्यक्ति अपना मैक्सिमम मेंटल एनर्जी पैसे कमाने में लगा देता है वह डिस्काउंट पर चीजें खरीदने के लिए अपना कीमती टाइम कभी बर्बाद नहीं करते हैं । क्योंकि उनको अपनी टाइम का वैल्यू पता होता है जिसमें कि वह आधा घंटा भी काम करके इतनी देर में वह उतना पैसा कमा लेंगे जिससे की सेम चीज बिना डिस्काउंट के वही फुल प्राइज पर खरीद सके।

इससे यह मालूम पड़ रहा है कि वह सामान खरीदने वाले व्यक्ति को रिचमाइंडेलिटी होती तो वह अपने घर के पास वाली दुकान से ही सामान खरीद करचला गया होता और अपने बचे हुए टाइम में कुछ नया सीख लिया होता जिससे कि वह पैसे कमा पाता । क्योंकि वह समझता कि आज के डिजिटल लाइफ में लोग अपने घर बैठे-बैठे अपने नॉलेज और स्कील के जरिए पैसा कमा रहे हैं।

एक रिच माइंड सेट वाला इंसान बहुत ही फास्ट एक्सीटयूट करता है और यह सबसे बड़ी डिफरेंस है एक सक्सेसफुल और अनसक्सेसफुली इंसान में, जहां एक सक्सेसफुल इंसान अपने काम को परफेक्ट बनाने में लगा रहता है वही एक रिच माइंड सेट वाला व्यक्ति जैसे ही कुछ सीखता है तुरंत ही उसे रियल लाइफ में आपलाई भी कर देता है।

यूट्यूबर टीमहन कहते हैं कि मैं 1 दिन आपने बिलेनियर मैटर के साथ वीडियो कॉल पर था और हम डिजिटल मार्केटिंग पर डिस्कशन कर रहे थे क्योंकि मुझे डिजिटल मार्केटिंग के बारे में थोड़ी अच्छी नॉलेज थी इसीलिए मैंने मेंटर को कुछ स्ट्रेटजी बताए जिससे कि वो अपने फेसबुक हेड को इंप्रूव कर सके पर जैसे ही हम दोनों की वीडियो कॉल खत्म हुई और लगभग 6 से 7 मिनट ही हुए थे तब तक मुझे उनका कॉल आ गया की मैं वह सारे मेथड और स्ट्रेटजी अप्लाई कर दिए जो तुमने मुझे अभी बताई है अब मैं कंटेंट अपमैजेसन के बारे में जानना चाहता हूं यूट्यूबर टीम हन कहते हैं कि मैं बहुत हैरान हो गया कि भला इतनी स्पीड में अभी सीखी गई बातों को कोई कैसे अप्लाई कर सकता है तभी टीमहन ने सोचा कि हां इतने फास्ट एक्यूजेशन की वजह से वह आज बिलेनियर है ।

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माइंड पॉवर के फाउंडर बिसन लखियानी ने भी उनकी लेटेस्ट बुक बुद्धा एंड बाडस में कुछ ऐसे ही मेथड के बारे में बताया है जिसका नाम है वोडा ( ooda observe orient decide act ) जो यूएस मलेटरी स्ट्रेटजी जॉन वॉइस ने किसी भी काम को स्पीड में execute बनाने के लिए बनाई थी ।

जॉन बॉय किसी भी काम को ही स्पीड में execute करने के लिए बनाई थी, जॉन बॉयस ने यह नोटिस किया कि एयर फोर्स में जो पायलट सबसे ज्यादा बुलेट बेस्ट करते थे वही सबसे बेस्ट पायलट थे, क्योंकि वह वोडा ( ooda observe orient decide act ) को फॉलो करते थे यानी कि ( ooda observe orient decide act )

यह कांसेप्ट कहता है कि जितना हो उतना जल्दी रिएक्शन लो और बाद में डिसाइड करो कि एक्शन सही है या नहीं इससे काम की स्पीड बढ़ेगी और आप जल्दी से आगे बढ़ पाओगे मतलब Feel Fast to Achieve Fast और यही मेथड का यूज़ अमीर लोग भी करते हैं ।

“रतन टाटा जी कहते हैं कि मैं सही डिसीजन लेने में बिलीव नहीं करता हूं मैं पहले डिसीजन लेता हूं और फिर बाद में उसे सही बनाता हूं।”

मान लीजिए कि और सुबह आप नहा रहे हो और उसी टाइम नहाते नहाते आपके माइंड में यूनिक आईडिया आ जाए तो जिससे की बहुत सारे लोगों को आप उस आइडिया को एग्जीक्यूट करने के लिए रिसर्च स्टार्ट करते हो जैसे कि यूट्यूब पर उस से रिलेटेड वीडियो देखते हो और आपको पता चलता है कि आपको अपने गोल तक पहुंचने के लिए कुछ सिंपल से स्टेप अपनाने पड़ेंगे पर अचानक से आप रुक जाते हो और सोचने लग जाते हो कि मुझे तो यह काम आता ही नहीं, मैं यह काम कैसे करूंगा मतलब कि आप बस How के बारे में सोचते हो ।

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जैसे कि मुझे App तो बनानी है पर मुझे कोडिंग नहीं आती, मुझे डिजिटल मार्केटिंग नहीं आती, मुझे यह नहीं आता मुझे वह नहीं आता है ऐसे ही एक्सक्यूज देने लगते हो अपने आपको तो मैं आपको यहां पर बता दूं कि jio के कस्टमर केयर पर क्या आप खुद मुकेश अंबानी आपका कॉल उठाते हैं या उनके एंप्लॉय, जोमैटो फूड ऑर्डर करने पर क्या जोमैटो के फाउंडर दीपेंद्र गोयल खुद वो पार्सल देने आते हैं सीधी सी बात है नहीं एप्पल कंपनी के मालिक स्टीव जॉब्स आईफोंस और आई बैच खुद बनाए थे जी नहीं। क्योंकि जहां पर एक आम इंसान अपने आपसे पूछता है HOW ?

वहीं पर एक रिचमाइंड सेट वाला इंसान अपने आप से पूछता है WHO? यानी कि वह कौन होगा जो मेरे लिए इस काम को मेरे से बेहतरीन ढंग से कर सकता और मान लीजिए कि एक CONTRACTOR को घर बनाने को देते हो आपको क्या लगता है वह आपका घर खुद बनाएगा जी बिल्कुल नहीं वह वह इंसान होगा जिसके पास WHO, की लिस्ट होगी उसके पास पोलंबर का नंबर होगा जो घर का पोलाम्बिंग करेगा उसके पास सारे सप्लाई का कांटेक्ट होंगे जिसकि उनको उस घर बनाने में उसकी जरूरत होगी उनकी जरुरत होती है WHO? ना कि HOW ?

यानी कि मेरे लिए यह काम कौन कर सकता है और इसीलिए एक कांट्रेक्टर घर बनाने में बाकी सब लोगों से ज्यादा पैसा कमाता है एक्चुअल में खुद कुछ काम किए आपको अगर एक अमीर इंसान बनना है तो अपने आप से पूछो WHO ना कि HOW ।

इसी तरह डोनाल्ड ट्रंप एक बार कई विलियम कर्जे में फंस गए थे वह कहते हैं कि जब भी मैं सड़क पर बैठे किसी गरीब इंसान को देखता तो मुझे यह लगता कि यह इंसान मुझसे कितना ज्यादा अमीर है क्योंकि उसके पास बस पैसे ही नहीं है मैं तो विलिनीयन के कर्जे में फस गया हूं, कर्ज ऐसी चीज है जो किसी भी नॉर्मल इंसान को तोड़ कर रख देती । लेकिन डोनाल्ड ट्रंप नहीं टूटे उन्होंने वह कर्ज खत्म किया और वापस अमीर भी बने वह सब कोई चमत्कार या उनके काम के वजह से नहीं हुआ।

यह सब सिर्फ इसलिए हुआ कि क्योंकि उनकी सोच यह थी उनकी माइंडसेट और आईडेंटिटी ने ही उनको वापस खड़ा किया और यूएस प्रेसिडेंट भी बनाया । कई लोगों को लगता है कि लोगों का काम उनको अमीर बनाता है जैसे कि साइब मसालों का काम अमीर बनाता है या गोल्ड का बिजनेस आमिर बनाता है या कुछ लोग मानते हैं कि ऐसे कोई तो खास चीज होगी जो अमीर को और अमीर बनाती है लेकिन सच तो यही है कि लोग अपने फेकी चीजे यानी कि स्क्रैप बेचकर ही कई करोड़ों कमाते हैं । क्योंकि बात सिर्फ काम की नहीं होती बल्कि इंसान की कैरेक्टर और उनके माइंडसेट की होती है।

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अमीर लोग OBSESSIVE यानी कि बहुत ही जूनोनी होते हैं उनकी एक आदत होती है कि वह किसी भी प्रॉब्लम के बारे में वह तब तक सोचते हैं जब तक की उनको उस प्रॉब्लम का कोई सलूशन नहीं मिल जाता।

WAL MART के CEO SAM WALTON दुनिया के सबसे अमीर आदमियों में से एक थे लेकिन जब भी वह अपने स्टोर पर जाते तो वह चुपके से अपने घुटने के बल बैठकर सेल्स के बीच का आएडेंट्र चेक कर लेते क्योंकि वह वह मानते थे कि उनके बिजनेस के बारे में हर छोटी से छोटी बात का जानकारी होनी चाहिए ।

फिर चाहे वह शॉपिंग कार्ड का डिजाइन हो या फिर स्टोर के बैकग्राउंड में बज रहा म्यूजिक वह छोटी से छोटी बात का ध्यान रखते थे और जरा यह सोचिए कि जो आदमी इतना अमीर है वह जो काम 100 लोगों से करवा सकता है वह यह काम खुद कर रहा है क्योंकि वह जुनूनी थे

अमीर लोगों को इस बात से फर्क नहीं पड़ता है कि दूसरे लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं अगर उनको चाय पिनी होती है तो वह चाय ही पीते हैं सिर्फ कुल दिखने के लिए कोल्ड ड्रिंक्स नहीं पीते हैं उनका दिमाग किसी भी सलूशन को फाइनल करने में भी इतना डूब जाता है कि वह किसी और चीज का परवाह नहीं करते हैं और यही जुनूनी उनकी ग्रोथ का रीजन होता है। जिससे वह इतने अमीर बनते हैं।

UBER दुनिया के सबसे बड़ी कंपनी में से एक है 69 COUNTRIES में अपनी सर्विसेज देती है और जिसकी कई बिलीयन डॉलर्स में वैल्यूएशन है अब यह अमेजिंग रिसर्च के पीछे का रिजन है ।

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UBER के फाउंडर टराविस का तरीका उन्होंने कंपटीशन करने के बजाए अपने दिमाग का यूज़ किया UBER आने से पहले भी टैक्सी चलती थी और लोग उसे यूज़ भी करते थे पर क्योंकि ज्यादा तर लोग कम्प्टेटयू माइंड के होते हैं इसीलिए कई बिजनेसमैन ने अलग-अलग टैक्सी सर्विसेज को जरूर खोलें पर किसी ने इस प्रॉब्लम के बारे में नहीं सोचा कि टैक्सी ना मिल पाना कितना प्रॉब्लमएटिक होता है, पर ट्रेविस ने सोचा कि क्यों ना एक ऐसी ऐप बनाया जाए जिसे पैसेंजर का टाइम वेस्ट ना हो और ड्राइवर को पैसेंजर मिल जाए और उसी सोच की वजह से ट्रैविस आज एक विलियन डॉलर कंपनी का CEO हैं ।

दुनिया में अब हजारों तरीकों से पैसे कमा सकते हो पर उसके लिए सबसे पहली चीज जो आपको करनी पड़ेगी वह होगी एक कॉन्पिटिटिव थिंकिंग से निकलकर क्रिएटिव थिंकिंग पर आना पर आना । बचपन से ही हमें दूसरों से कंपेयर करना सिखाया जाता है चाहे वह एग्जाम के मार्क्स हो या कंपनी में प्रमोशन जिसकी वजह से क्या होता है कि हमारी क्रिएटिव थिंकिंग ही खत्म हो जाती है और हम हमारे सामने पड़ी प्रीलिएंट Opportunity को भी नहीं देख पाते हैं । हमेशा क्रिएटिव सोचो Competitive करने का नहीं बल्कि कुछ क्रिएट करने का सोचा और इस पूरे लेख को समराईज करके बताऊँ तो इस लेख में हमने पुअर और रिच माइंड सेट को जाना है।

The Science of Getting Rich Book Summary in Hindi

1. इसमें सबसे पहला स्टेप था POOR MIND SET वाला आदमी थोड़ी सी रुपए बचाने के चक्कर में अपना टाइम वेस्ट करता है वहीं एक RICH MIND SET वाला व्यक्ति थोड़ी ज्यादा पैसा पे (PAY) करके भी अपने टाइम को प्रोटेक्ट करता है जिससे वह और ज्यादा earn कर सके ।

2. दूसरा सबसे बड़ा डिफरेंट था कि एक अमीर आदमी एक्स ओरियटेंट होता है से कि वह चीजों को बहुत फास्ट एक्सक्यूट करता है और उतनी ही नॉलेज लेना जितना कि उसे पहला स्टेप पूरा करने के लिए चाहिए होती है।

3. दूसरी तरफ एक गरीब माइंडसेट वालाआदमी ना कोई एक्शन लिए बस इंफॉर्मेशन ही कंजुम करते रहता हैं जिसकी वजह से अपने गोल तक कभी नहीं पहुंच पाता ।

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4. हमेशा WHO ना कि HOW के बारे में सोचो, क्योंकि उसे पता है अगर उसे अपने सपनों को पूरा करना है तो उसे बहुत से लोगों की जरूरत पड़ेगी जबकि गरीब माइंडसेट वाला आदमी वह सपना ही नहीं देखता या तो सपना देखता है तो वह यह सोचता है कि उस सपने को पूरा करने के लिए हर चीज उसे खुद करनी पड़ेगी।

जिस सोच की वजह से कभी अपने विजन को रियालिटी में कन्वर्ट नहीं कर पाता है जिसको डोनाल्ड ट्रंप के एग्जांपल से हमने देखा की किसी भी रीच माइंड सेट वाला इंसान कोई चमत्कार से नहीं बल्कि अपनी सोच से और कैरेक्टर की वजह से अमीर बनता है।

5. रिचमेंटालिटी वाला इंसान वॉल्टन की तरह OBSESSIVE यानी कि जुनूनी होता है पर अपने फील्ड की हर छोटी से छोटी बातों इ जानकारी रखता है ।

6. UBER के एग्जांपल से आपने यह जाना कि एक अमीर इंसान कॉन्पिटिटिव थिंकिंग से निकलकर क्रिएटिव थिंकिंग पर फोकस करता है।

आज के लिए बस इतना ही, मुझे उम्मीद है की आपको हमारा यह लेख बहुत पसंद आया होगा । यदि पसंद आया हो तो कृपया करके आप सभी इस लेख को अपने सभी दोस्तों के साथ में शेयर जरुर करे ।

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आपका बहुत – बहुत धन्यबाद !

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