Motivational Story in Hindi Inspirational Moral stories

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Motivational Story in Hindi Inspirational Moral stories

Motivational Story in Hindi Inspirational Moral stories

Motivational Story in Hindi Inspirational Moral stories. हमारे माता-पिता हमारे लिए बहुत ही आदरणीय होते हैं. वह हमारा लालन पालन करते हैं. वे हमारे ऊपर अनगिनत उपकार करते हैं. उनका कर्ज चुका पाना शायद संभव नहीं होता. माता-पिता हमारे पहले गुरु होते हैं. हमारे माता-पिता भगवान के रूप होते.

आप इस पोस्ट को लास्ट तक जरूर पढ़ें. पोस्ट समाप्त होने तक आपको सब कुछ पता चल जायेगा. इसके लिए सबसे पहले मैं आपको एक छोटी सी कहानी बताता हूं. एक बार एक टॉपर स्टूडेंट अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद एक इंटरव्यू देने के लिए गया.

वह स्टूडेंट फर्स्ट इंटरव्यू पास कर गया और दूसरा इंटरव्यू डायरेक्टर को लेना था. डायरेक्टर को ही तय करना था कि उसे जॉब पे रखा जाए या नहीं. डायरेक्ट ने स्टूडेंट के रिज्यूमे देखा, पढ़ाई के साथ-साथ वह लड़का एक्स्ट्रा करिकुलम में भी हमेशा फर्स्ट रहा है.

Motivational Story in Hindi Inspirational Moral stories
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Motivational Story in Hindi

डायरेक्टर बोला, क्या तुम्हें स्टडी के दौरान कभी स्कॉलरशिप मिली.
स्टूडेंट जवाब देता है, जी नहीं.
डायरेक्टर बोलता है, इसका मतलब स्कूल का फीस तुम्हारे पिता पे करते थे.जी हां.

डायरेक्टर बोलते हैं, तुम्हारे पिताजी काम क्या करते हैं, जी वे मजदूरी करते हैं.
यह सुनकर डायरेक्टर ने कहा जरा अपने हाथ दिखाना. स्टूडेंट के हाथ बहुत ही मुलायम और नाजुक थे. डायरेक्टर बोला – क्या तुमने कभी पिता के काम करने में मदद की. स्टूडेंट बोला जी नहीं. मेरे पिता हमेशा यही चाह रहे थे कि मैं स्टडी करूंगा और ज्यादा से ज्यादा किताबें पढूंगा.

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मेरे पिता मुझसे कहीं ज्यादा तेजी से काम करते हैं. क्या मैं तुमसे एक काम कह सकता हूं ? स्टूडेंट बोला जी कहिये. डायरेक्टर बोला – आज घर वापस जाने के बाद अपने पिता के हाथ धोना फिर कल सुबह मुझसे आकर मिलना. वह लड़का यह सुनकर प्रसन्न हो गया. उसे लगा कि अब जॉब मिलना पक्का है. तभी तो डायरेक्टर ने कल फिर बुलाया है.

घर जाकर खुशी-खुशी पिता को यह बात बताया और अपने हाथ दिखाने को कहा. पिता जी को यह सुनकर काफी हैरानी हुई, लेकिन फिर भी अपने बेटे की इच्छा का मान रखते हुए दोनों हाथ उसके हाथ में दे दिए. स्टूडेंट्स ने अपने पिता के हाथ धीरे धीरे धोना शुरू ही किया था उसकी आंखों से आंसू झर-झर बहने लगे.

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पिता के हाथ सख्त और जगह-जगह से कटी और फटे हुए थे. यहां तक कि कटे के निशान के ऊपर जब भी वह पानी डालता वहां चुभन का एहसास पिता के चेहरे पर साफ़ दिखता. स्टूडेंट को जिंदगी में पहली बार ऐसा हुआ कि यह वही हाथ है जो रोज लोगों के यहाँ काम करके उसके लिए अच्छे खाने, कपड़ों और स्कूल जाने का इंतजाम करते थे.

हाथ का हर कटा हुआ निशान सबूत था उसके अकेडमिक कैरियर की. पिता के उस दिन के बचे हुए सारे काम वो एक-एक करके करता गया. पिता रोकते ही रह गए लेकिन स्टूडेंट अपनी धुन में काम करता चला गया.

उस रात बाप-बेटे ने काफी देर तक बातें की. सुबह स्टूडेंट फिर जॉब के लिए डायरेक्टर के ऑफिस में गया. डायरेक्टर का सामना करते हुए छात्र की आंखें नम थी. डायरेक्टर बोलते हैं, तो फिर कैसा रहा कल घर का एक्सपीरियंस. मेरे साथ शेयर करना पसंद करोगे, जी हां.

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मैंने जिंदगी का एक बहुत बड़ा लेसन सिखा की सराहना क्या होती है. क्या होते हैं रिश्ते. मेरे पिता ना होते तो मैं पढ़ाई में इतना आगे नहीं आ सकता. उनकी मदद करने से मुझे पता चला कि किसी काम को करना कितना सख्त और मुश्किल होता है.

रिश्तों की अहमियत पहली बार इतनी शिद्दत के साथ महसूस की. डायरेक्टर बोला यही सब कुछ है जो मैं अपने मैनेजर में देखना चाहता हूं. मैं जीसे जॉब देना चाहता हूं. जो दूसरों की मदद की कद्र करें. ऐसा व्यक्ति काम किए जाने के दौरान दूसरों की तकलीफ को महसूस करे.

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ऐसा सक्स जिसने सिर्फ पैसा कमाने का ही अपने जीवन का गोल न बना रखा हो. तुम इस जॉब की पूरी हकदार हो. दोस्तों आज यह वीडियो बनाने के पीछे एक कारण है. आज मैं कुछ बोलना चाहता हूं उन लोगों को खासकर उन बेटों को, जो अपने पेरेंट्स की कदर नहीं करते और बड़ी निर्दयता से अपने मां-बाप को त्याग देते हैं. उन्हें वृद्धाश्रम छोड़ देते हैं.

जो बाप अपनी कमाई का एक पाई अपने बच्चों पर लुटा देता है और एक बार भी नहीं सोचता. जिस मां-बाप ने हमें जन्म दिया, जिसने उंगली पकड़कर चलना सिखाया, कदम- कदम पर हमारी मदद की. और जब वह बूढ़े हो गए हैं, उनकी आँखें फीकी गई हैं तो क्या हमारा कर्तव्य नहीं है कि हम उनका सहारा बने, उनकी मदद करें.

इसके साथ ही में उन पेरेंट्स को भी कहना चाहता हूं कि आप चिल्ड्रन को बड़ा मकान दे, बढ़िया खाना दे, बड़ा टीवी, मोबाइल, कंप्यूटर सब कुछ दीजिए. साथी ही काम करने में कैसा लगता है, अपने हाथों से फील होने दे.

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खाना खाने के बाद कभी बर्तन धोने का अनुभव भी अपने साथ करके सब बच्चों को मिलकर करने दें. ऐसा इसलिए नहीं कि आप पैसा खर्च नहीं कर सकते बल्कि इसलिए कि आप अपने बच्चों से ऐसे ही प्यार करते हैं. आप उन्हें समझाते हैं कि पिता कितने भी अमीर क्यों ना हो एक दिन उनके भी बाल सफेद होने हैं.

जरूरी है कि आप अपने बच्चे को किसी काम को करने की कोशिश की क़द्र करना सिखायें. और वे एक दुसरे का हाथ बटाते हुए काम करने का जज्बा अपने अंदर लाएं. दोस्तों एक बात मैं पूरे यकीन के साथ कह सकता हूं कि कोई भी व्यक्ति अपने मां-बाप का तिरस्कार करके कभी सफल नहीं हो सकता.

यदि आपको यह कहानी पसंद आई हो तो कृपया करके आप इस कहानी को अपने सभी दोस्तों के साथ शेयर जरुर करें.

बहुत बहुत धन्यवाद.

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