Motivational Stories in Hindi ऐसी कहानी जो आपकी सोच बदल देगी All about to network marketing and direct selling in hindi

Motivational Stories in Hindi ऐसी कहानी जो आपकी सोच बदल देगी

Motivational Stories in Hindi ऐसी कहानी जो आपकी सोच बदल देगी

आज मैं आप सभी को एक Motivational Stories in Hindi सुनाऊंगा. इस Motivational Story में बहुत अच्छा एक सन्देश दिया गया है. जो आपको आपकी जीवन में बहुत काम आयेगी.

दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं, एक वे जो छोटी सी प्रॉब्लम आ आने पर घबरा जाते हैं और दुखी हो जाते हैं. दूसरे वह लोग होते हैं, चाहे कितनी भी बड़ी मुश्किले उनकी जिंदगी में आ जाए लेकिन वह हमेशा खुश रहते हैं.

हर प्रॉब्लम में अपने आप को संभाल लेते हैं. एक वे जो जिनके पास सब कुछ होते हुए भी लेकिन फिर भी वह हमेशा दुखी दिखते हैं. आपको हमेशा वे दुखी ही मिलेंगे और दूसरे वे जिनके पास कुछ हो या ना हो लेकिन वह आपको हमेशा खुश दिखते हुए मिलते हैं, मुस्कुराते हुए मिलते हैं.

आज हम ऐसे ही एक Motivational Story in Hindi के बारे में बात करेंगे. यह कहानि ऐसी है कि आपके जीवन में हजारों मुश्किलें या बड़ी परेशानियां क्यों ना आ जाए लेकिन यह कहानि आपको हर मुश्किल में रहना और मुस्कुराना सिखा देगी.

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Motivational Stories in Hindi

एक फकीर एक देश की यात्रा पर निकला, जब रास्ते में रात हो गई तो वे एक व्यक्ति घर रुक गया. उस व्यक्ति का नाम था आनंद. आनंद ने उस फकीर की खूब सेवा की और दूसरे दिन आनंद ने फकीर को उपहार देकर विदा किया. वह फकीर आनंद की सेवा से बहुत खुश हो गया और दुआएं देने लगा की हे भगवान आनंद को हमेशा खुश रखना और वह हमेशा दिन प्रतिदिन आगे बढ़ता ही रहे.

इस बात पर आनंद हंसने लगा और फकीर से आनंद बोला, हे फकीर जो है वह भी अब नहीं रहने वाला. इस बात पर फ़क़ीर आनंद की तरफ देखता ही रहा और वहां से आगे चला गया .

कुछ साल बाद फिर फकीर आनंद के घर आया और देखा सारा धन और सारी संपत्ति सब कुछ चला गया है. आनंद एक गांव के ही बड़े जमीदार के यहाँ नौकरी कर रहा है. वह फकीर आनंद से मिलने के लिए वहां चला गया.

आनंद ने उस अभाव में ही उस फकीर का स्वागत किया और झोपड़ी में ही फटी चटाई पर ही बैठाया. उसके पास खाने के लिए जो रुखी सुख रोटी थी वह खाने के लिए फ़क़ीर को दे दिया जब फकीर वहां से जाने लगा तो उसके आँख में आंसू था और फ़क़ीर कहने लगा हे भगवान तुमने यह क्या किया.

तो आनंद फिर हंसा और कहने लगाया अरे फकीर तू क्यों दुखी हो रहा है. ईश्वर हमें जिस हाल में भी रखें हमें हमेशा खुश रहना चाहिए उसे धन्यवाद देना चाहिए. समय सदा बदलता रहता है और इतना ही नहीं यह भी नहीं रहने वाला है . इस पर फकीर सोचने लगा कि मैं तो केवल वेस से ही फकीर हूं लेकिन सच्चा फ़क़ीर तो तुम हो आनंद.

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कुछ साल बाद फकीर फिर से यात्रा पर निकला और आनंद से मिला और देखा तो देखता ही रह गया क्योंकि सब कुछ बदल चुका था आनंद अब जमीनदारो का जमीनदार बन चुका था. उसे मालूम हुआ आनंद जिस जमीनदार के यहां नौकरी कर रहा था उसकी कोई संतान नहीं थी और अपनी सारी संपत्ति और जायदाद आनंद को दे दी .

फकीर बहुत खुश हो गया और आनंद से कहा अच्छा हुआ वह जमाना गुजर गया भगवान करे अब तूम ऐसा ही बना रहो यह सुनकर आनंद फिर हंसने लगा और कहने लगा. फकीर अभी भी तेरी नादानी बनी हुई है . फकीर ने फिर आनंद से पूछा क्या यह भी नहीं रहने वाला तो आनंद ने उत्तर दिया हाँ. या तो यह चला जायेगा या फिर इस को अपना मानने वाला ही चला जायेगा.

यहाँ पर कुछ भी रहने बाला है ही नहीं, अगर कोई चीझ सास्वत है तो वह है हमारी आत्मा, वह है हमारी मन कि शांति, वह है हमारे मन का सकून और बाकि जो कुछ भी है वह हमेसा रही नहीं सकता. फ़क़ीर ने आनद कि बातो को बहुत ही ध्यान से सुना और वापस चला गया.

जो होता है उसे स्वीकार करो

कुछ सालो के बाद फिर फकीर जब उस गाँव से गुजरा तो आनंद का महल तो है लेकिन उस में आनंद ही नहीं है. उसमें कबूतर गुटरगू कर रहे है आनंद अब इस दुनिया में नहीं रहा, उस कि मृत्यु हो चुकी थी . वह फकीर मन ही मन सोचने लगा कि यह एक इंसान जिन्दगी भर कितना दौड़ता रहता है और रोता रहता है, दुखी होता रहता है.

जिन चिझो के लिए इंसान तड़पता रहता है दुखी होता रहता है, वास्तव में वह चीझ जो हमेसा रहने वाली है ही नहीं, वे सारी चिझे बदलने वाली है . यह कहानी यह शिक्षा देती है कि हमारे जिन्दगी में जब भी कोई मुस्किल, तकलीफ या दुख आए तो हमें यह सोचना चाहिए कि
जिन्दगी में इससे पहले मुश्किले या उलझने आईं तो क्या वे हमेसा रुकी रही, जैसे सारी मुश्किले आकर चली गई वैसे ही यह भी मुस्किल चली जाएगी.

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यह भी हमेसा रहने वाली नहीं है. तो आप हमेसा याद रखिये कि जिन्दगी में कितना भी बड़ा दुःख क्यों न हो वह हमेसा रहने वाली नहीं है. ये दुःख भी चले जायेगे .

एक बार अकबर ने बीरबल से कहा की बीरबल आज कुछ ऐसा लिखो की जब मैं ख़ुशी में पढूं तो दुःख और जब दुःख में पढूं तो ख़ुशी हो. तो बीरबल ने लिखा

” यह वक्त भी बीत जायेगा “

ये एक ऐसा वाक्य है जब इसे ख़ुशी में पढेंगे तो दुःख होगा और दुःख में पढेंगे तो ख़ुशी होगा.

मुझे उम्मीद है की आप सभी को आज का यह कहानी बहुत पसंद आया होगा, यदि पसंद आया हो तो कृपया आप इस कहानी को सबके साथ में शेयर जरुर करें.

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बहुत – बहुत धन्यवाद .

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ANGESH KUMAR

Hello Everyone, My Name is Angesh Kumar. I'm hailing to Padruna - Kushinagar (U.P). I have completed my graduation from JSSEI Gonda in 2017.I'm a Digital Marketer and Network Marketer last 2 Years. I'm sharing my knowledge with you, So Please Support me.

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