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Moral Stories in Hindi क्या होती है मुश्किलें और इन मुश्किलों से कैसे छुटकारा पाएं

Moral Stories in Hindi क्या होती है मुश्किलें और इन मुश्किलों से कैसे छुटकारा पाएं

Short Moral Stories in Hindi. एक बार की बात है, एक गांव में राहुल नाम का व्यक्ति रहता था. वह बहुत ही अपने जीवन में होने वाली कठिनाइयों से परेशन था. जब एक मुश्किल खत्म होती थी तो दूसरे मुश्किल आ जाती थी इस कारण से वह परेशान रहता था.

इस मुश्किल से छुटकारा पाने के लिए अपने गुरुदेव के पास गया वहां जाकर अपनी कहानी गुरुदेव से बताइए. गुरुदेव ने उसकी बातों को ध्यान से सुना, गुरुदेव बिना कुछ कहे उसे अपनी रसोई घर में ले गए जहां पर एक पतीले में गाजर, दूसरे पतीले में अंडा और तीसरी पतीले में काफी रखा हुआ था.

Moral Stories in Hindi

फिर गुरुदेव ने 20 मिनट बाद तीनों चूल्हे बंद कर दिए. उन्होंने गाजर निकाले और एक बर्तन में रख दिया, फिर अंडा निकाले उसे भी एक बर्तन में रख दिए, उसके बाद काफी निकाली एक चम्मच भर के उसे भी एक बर्तन में रख दिया और गुरुदेव ने राहुल से पूछा अब बताओ तुम्हें क्या दिख रहा है ?

राहुल ने बोला – गाजर , अंडा और काफी ही दिख रहा है. गुरुदेव बोले राहुल तुम पास आओ और इसे छूकर बताओ. राहुल ने गाजर को छूकर गुरुदेव से कहा यह तो गाजर नरम है, फिर गुरुदेव ने कहा राहुल एक अंडा लो और उसे तोड़ दो, राहुल ने अंडा लेकर तोड़ दिया और बोला गुरुदेव यहां तो उबला हुआ है.

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फिर गुरुदेव ने आदेश दिया राहुल अब काफी पियो, राहुल ने जैसे काफी पिया उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई उसने कहा गुरुदेव काफी तो बहुत अच्छी है और इसका खुशबू भी बहुत अच्छा है पर गुरुदेव मेरे प्रश्नों का उत्तर तो दीजिए.

गुरुदेव ने मुस्कुराते हुए कहा , तुम्हारे प्रश्नों के जवाब भी मिल चुके हैं, तो राहुल ने बोला वह कैसे आपने हमें बताया ही नहीं है अभी तो, गुरुदेव ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया की इन तीन चिझो ( गाजर , अंडा और काफी ) ने एक जैसी ही तकलीफ झेली है उबलते हुए पानी में , मगर हर किसी ने अलग-अलग बर्ताव किया और अलग-अलग रिजल्ट भी आए.

गाजर कड़क और मजबूत था मगर गर्म पानी में जाते ही नरम और कमजोर होकर बाहर निकला. अंडा कमजोर था लेकिन उसके पतले बाहरी छिलके ने उसके अंदर का द्रव्य को बचाया कर रखा था, मगर जब वह गरम पानी से होकर निकला तो अंदर से सख्त बनकर निकला.

सबसे अनोखी तो काफी था, जिसके पिसे हुए दाने जब उबलते हुए पानी में डाले गए, तो उसने पानी को ही बदल दिया. जब परेशानियां हमारी दरवाजा खटखटाती हैं तब हम उस परेशानियों के साथ कैसा बर्ताव करते हैं यह हमारे ऊपर निर्भर करता है. क्या तुम गाजर हो, अंडा या काफी ?

गुरुदेव ने राहुल से कहा इन तीन चिझो से तुम अपने परेशानियों का तुलना करो ? क्या मै एक गाजर हूं जो दिखता तो बहुत मजबूत और कड़क है, मगर दुख और परेशानियों मैं कमजोर बनकर अपना ताकत खो देते हो.

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क्या मैं एक अंडा हूं जो शुरू में नाजुक और कमजोर होता है मगर गर्म पानी में जाते ही कठोर और सख्त हो जाता है. या कहीं काफी के बीज जैसा हूं मैं, जो गर्म पानी में जाते ही पानी को ही बदल देता है. उस पस्थिति को जो उसे नष्ट कर रही है, जब गर्म पानी में होता है तो वह अच्छी खुशबू और रंगत देने लगता है.

गुरुदेव ने कहा, अगर तुम काफी के बीज जैसे हो , तो जब चिझे सबसे खराब होती हैं तब बेहतर बन सकते हो और परिस्थिति को ही बदल सकते हो. क्या है आप ? गाजर, अंडा या काफी के बीज , हमें जरूर कमेंट करके बताएं.

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आप अपना कीमती समय निकालकर इस कहानी Moral Stories in Hindi को पढ़ा उसके लिए तहे दिल से धन्यवाद.

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ANGESH KUMAR

Hello Everyone, My Name is Angesh Kumar. I'm hailing to Padruna - Kushinagar (U.P). I have completed my graduation from JSSEI Gonda in 2017.I'm a Digital Marketer and Network Marketer last 2 Years. I'm sharing my knowledge with you, So Please Support me.

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