China Rename 15 places in Arunachal Pradesh चीन ने अरुणाचल प्रदेश के 15 स्थानों के नाम बदले

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चीन ने बदला भारत की अरुणाचल प्रदेश में 15 जगहों के नाम, 1 जनवरी 2022 से लागू हो गए हैं चीन की नई बाउंड्री लॉ, जानिए क्या है पूरा मामला?

China Rename 15 places in Arunachal Pradesh : आपको और हमको यह न्यूज़ काफी परेशान करती  है, साथ ही सोचने पर मजबूर कर देती है कि आखिर चीन ऐसा कैसे कर सकता है। भारत और चीन आपस में कब शांति बनाएंगे। अक्टूबर की ही बात है कि चीन अपने यहां के संसद में नए बाउंड्री लॉ को पारित कीया है।  इसके मुताबिक यह नए बाउंड्री लॉ 1 जनवरी 2022 से लागू हो जाएंगे।

उसी नए बाउंड्री लॉ के हिसाब से चीन ने भारत के अरुणाचल प्रदेश में 15 जगहों के नाम बदल दिया है। चीन ने उन जगहों के नाम बदले हैं जिसे वह अपना हिस्सा मानता है। उसका यह कहना है कि वह जिन जगहों के नाम बदले हैं वह भारत का अरुणाचल प्रदेश नहीं है, बल्कि तिब्बत का एक हिस्सा है। जिसको वह दक्षिणी तिब्बत मानता है और उसे जांगनान नाम देता है।

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चीनी का यह कहना है कि जब तिब्बत हमारा है तो उसके हिसाब से उसका नामकरण भी हम ही करेंगे। चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय ने घोषणा की थी कि उसने जांगनान समेत अरुणाचल प्रदेश के 15 स्थानों के नामों को चीनी, तिब्बती और रोमन भाषा में किया है।

China Rename 15 places in Arunachal Pradesh
China Rename 15 places in Arunachal Pradesh

चीन ने भारत की अरुणाचल प्रदेश में 15 जगहों के बदले नाम

China Rename 15 places in Arunachal Pradesh अरुणाचल प्रदेश के 15 स्थान जिनके नामों में बदलाव किया गया है, इसमें आठ आवासीय स्थान हैं, चार पहाड़, दो नदियां और एक पहाड़ी दर्रा शामिल है। चीन द्वारा दिए गए अरुणाचल प्रदेश में स्थानों के नाम बदलने का दूसरा मामला है। क्योंकि चीन ने इससे पहले 2017 में भी छह स्थानों के नामों को बदलने का पहला बैच भी जारी किया था।

चीन ने जिन आवासीय जगहों के नाम बदले हैं उनके क्या नाम है?

चीन ने जिन आठ आवासीय स्थानों के नामों को बदला है उनमें शन्नान प्रान्त के कोना काउंटी में सेंगकेज़ोंग और डग्लुंगज़ोंग, न्यिंगची के मेडोग काउंटी में मणिगंग, ड्यूडिंग और मिगपेन, न्यिंगची के ज़ायू काउंटी में गोलिंग, डंबा और शन्नान प्रान्त के लुंज़े काउंटी में मेजाग शामिल हैं।

चीन ने जिन पहाड़ और नदियों के नाम बदले हैं उनका क्या नाम है?

चीन ने जिन चार पर्वतों के नाम चीनी अक्षरों पर रखे हैं, उनमें वामो री, दाऊ री, ल्हुन्जुब री और कुनमिंग्ज़िंग्ज़ी फेंग हैं। जबकि ज़ेनोग्मो हे और दुलेन हे नदी का नाम बदला गया है। साथ ही एक पहाड़ी दर्रा कोना काउंटी में ला नाम से है, जिसका नाम भी चीन ने बदल दिया है।

इन 15 में से 8 क्षेत्रों में तिब्बती लोग रहते हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची का यह कहना है कि चीन ने ऐसा पहली बार नहीं किया है, इससे पहले भी चालबाज चीन ने अप्रैल 2017 में अरुणाचल प्रदेश राज्य में स्थानों के नाम बदलने को कोशिश की थी ।

क्या चीनी से अंतरराष्ट्रीय मान्यता दिला पाएगा?

चीन के द्वारा बदले गए स्थानों को यदि अंतरराष्ट्रीय मान्यता दिलानी है तो उसे सबसे पहले यूनाइटेड नेशन की ज्योग्राफिकल कमेटी को यह नाम देने होंगे। दिए गए नामों को पुष्टि करने के लिए वहां की टीम उन बदले गए जगहों पर पहुंचती है, और उन लोगों से पूछती है कि यह जो नाम बदला गया है क्या आप लोगों को मंजूर है या नहीं। यदि लोगों को मंजूर हुआ तो उसके नाम भी बदले जा सकते हैं।

चीन के द्वारा बनाई गई लैंड बाउंड्री एक्ट क्या है?

लैंड बाउंड्री एक्ट 1 जनवरी 2022 से लागू हो गई है। इस एक्ट में यह कहा गया है कि चीन अपने बॉर्डर के आसपास के क्षेत्रों का विशेष ख्याल रखेगा, और वहां पर ले जाकर अपने ग्रामीणों को बसाएगा। चीन 14 देशों के साथ अपनी बॉन्ड्री बनाता है।

जबकि इसका 18 देशों के साथ बॉर्डर विवाद है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह उन जगहों पर भी जाकर विवाद कर लेता है जिन जगहों की सीमा उसकी बॉर्डर से नहीं लगती है। जैसे साउथ चाइना सी के लिए सिंगापुर, मलेशिया, इंडोनेशिया और ब्रूनेई से भी अपनी सीमा विवाद रखता है।

चीन 14 देशों के साथ अपनी बाउंड्री बनाता है।

  • भारत चीन के साथ 3428 किलोमीटर है लंबी सीमा साझा करता है।
  • लैंड बाउंड्री एक्ट 1 जनवरी 2022 से लागू हो गई है।
  • 15 में से 8 क्षेत्रों में तिब्बती लोग रहते हैं।
  • अप्रैल 2017 में अरुणाचल प्रदेश राज्य में स्थानों के नाम बदलने को कोशिश की थी ।

चीन ने भारत की अरुणाचल प्रदेश में 15 जगहों के बदले नाम बदल दिए हैं।

यह खबर सुनकर पूरे भारत के लोगों को भी बुरा लग रहा है। चीन का इलाज सिर्फ इतना ही है कि भारत अपने बॉर्डर के एरिया में उसी तरह का कार्य करें जिस तरह का काम चीन कर रहा है। चीन अपने यहां के बॉर्डर क्षेत्रों में ले जाकर लोगों को बसा रहा है। चीन का यह मानना है कि जब तक बॉर्डर पर लोग नहीं रहेंगे तब तक वहां की खबर उसे मालूम नहीं चलेगी।

जिस तरह की रणनीति अपना रहा है, भारत को भी उसी तरह की रणनीति अपनानी होगी। बॉर्डर सुरक्षित रखने का यह सबसे बढ़िया तरीका है। लोगों के अलावा यदि वहां पर पर्यटन की व्यवस्था हो जाए तो वहां की खबरें आसानी से मिलती रहती है। चीन का हमेशा से यह सोच रहता है कि जिन बॉर्डर क्षेत्रों में लोग नहीं रहते हो वहां पर जाकर वह कब्जा कर लेता है।

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