America and Russia are Developing Dangerous “Killer Robots” !!

अमेरिका और रूस विकसित कर रहे हैं खतरनाक “किलर रोबोट” !!

America and Russia are Developing Dangerous “Killer Robots” : यह एक ऐसी खबर है जिससे पूरी दुनिया चिंतित है। इस खबर से परेशान होकर दुनिया के 125 देशो ने US के नेतृत्व में 5 दिनों तक जनेवा में बैठक की है। Convention on Certain and Convention of Weapons संगठन 1983 से चला आ रहा है। इस बैठक में यह इस बात पर चर्चा किया गया कि कोई भी देश अभी किलर रोबोट नहीं बनाएगा।

America and Russia are Developing Dangerous Killer Robots
America and Russia are Developing Dangerous Killer Robots

किलर रोबोट क्या है?

दुनिया भर में इस बात की होड़ मची हुई है कि किस देश के पास कितने तरह के रोबोट्स मौजूद हैं। इन किलर रोबोट के माध्यम से ही आने वाले समय में युद्ध लड़े जाएंगे। दुनिया के 125 देशों में कुछ देशों का यहां तक कहा है कि चाहे कुछ भी हो जाए लेकिन हम किलर रोबोट बनाएंगे। इस बैठक में इन सभी देशों में आपसी सहमति नहीं बनी है।

किलर रोबोट एक ऐसा मशीन होगी जो युद्ध में, मशीनी रूप से युध्द कि जाएगी जिसमें कोई इंसान नहीं होगा। यह किलर रोबोट युद्ध के मैदान में जाएगी और जिधर से इसको खतरा महसूस होगा उधर वह गन से उस तरफ हमला कर देगी।

इस रोबोट को युद्ध के मैदान में ले जाकर देखा गया है, जहां पर यह सटीक निशाना लगा रहा था और लोहे की रॉड से इस पर हमला करके भी देखा गया, इसे खत्म करने की भी कोशिश की गई लेकिन यह रोबोट फिर से खड़ा होकर हमला करने में भी माहिर है।

इस रोबोट को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह रोबोट खुद अपने आप यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से सेंस ( महसूस ) कर सकता है कि उसे किसको मारना है और किसको नहीं मारना है। इसके अंदर ऐसी मशीनें लगी है जो यह पहचान लेता है कि कौन उसका दुश्मन है जिसको उसे टारगेट करना है।

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आप इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि दुनिया किस तरफ जाने की तैयारी कर रही है। अगर भविष्य में कहीं पर इस तरह के रोबोट से युद्ध हो गई तो उस समय क्या स्थिति होगी। यह सही और गलत की पहचान करके अपने दुश्मन को भांप लेता है और उस पर गोली चला देता है। इस किलर रोबोट पर मिसाइल और अन्य किसी चीज़ का भी असर नहीं होता है।

रूस और अमेरिका का क्या कहना है ?

रूस और अमेरिका जैसे बड़े देशों ने यह कहा कि यह किलर रोबोट बनाने से हमें कोई नहीं रोक सकता क्योंकि इस पर हमने कई बिलियंस रुपए खर्च कर दिए हैं। जल्द ही अमेरिका अपने तीनों सेनाओं थल सेना, वायु सेना और जल सेना को इस किलर रोबोट से लैस करने जा रहा है।

ठीक उसी प्रकार से चीन ने यह कहा है कि वह 2030 तक किलर रोबोट का सबसे बड़ा मार्केट होगा और वह भी अपनी सेनाओं को इन रोबोट से लैस कर देगा। लोग अब यह बातें कर रहे हैं कि अभी तक जो ड्रोन बनाए गए थे उसको उड़ाने के लिए मनुष्य अपने हाथों से बटन दबाता था। लेकिन यह पूरी तरह से ऑटोमेटिक मशीन है।

ऐसे में देखा जाए तो यह एक मशीन है जो खुद पर पूरी तरह नियंत्रण कैसे रख पाएगी। अगर इसमें कुछ ऐसी गड़बड़ी हो जाए जिससे कि यह किसी दुश्मन को मारने की जगह कोई अपने आदमी को ही मार दे जिसको उसे नहीं मारना चाहिए था तो इससे काफी नुकसान हो सकता है।

किलर रोबोट की क्या खासियत है ?

  1. किलर रोबोट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित वेपन सिस्टम है।
  2. इस फुली ऑटोनॉमस वेपंस को इंसान संचालित नहीं करते हैं।
  3. किलर रोबोट हमला करने या किसी को मारने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI का इस्तेमाल खुद करते हैं।
  4. इन्हें ऑटोनॉमस या लीथल ऑटोनॉमस वेपंस सिस्टम भी कहा जाता है।
  5. यह रोबोटिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI और इमेज रिकॉग्रिशन से बना रहे बेहतर किलर रोबोट्स है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस Artificial intelligence क्या है ?

जब आदमी अपने दिमाग की जगह मशीनी दिमाग का उपयोग करने लगे अर्थात जो मशीन अपने द्वारा डाला गया डाटा है उसके आधार पर निर्णय लेने लगे तो उसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस Artificial intelligence कहते हैं।

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किलर रोबोट को बैन करने की मांग क्यों उठ रही है ?

किलर रोबोट का विरोध करने वाला सबसे बड़ा देश साउथ कोरिया है। जहां पर सबसे ज्यादा लोगों के द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है और इसे बैन करने की मांग की जा रही है। जिसका कुछ प्रमुख कारण है:

  1. इसमें जीवन और मौत का फैसला सेंसर, सॉफ्टवेयर और मशीन की प्रोसेस पर निर्भर होता है।
  2. यह ड्रोन जैसी सेमी ऑटोनॉमस वेपंस के उलट है, जिन्हें कहीं दूर से इंसान ऑपरेट करता है।
  3. किलर रोबोट के हाथ में है जीवन और मौत का फैसला देने से मानवता को खतरा होगा।
  4. इनके लिए हमला करने वाले और सरेंडर करने वाले सैनिको में अंतर करना मुश्किल होगा।
  5. किलर रोबोट को लड़ाई में उतरने से बहुत सारे निर्दोषों को मारे जाने का खतरा होगा।

दुनिया में यूरोपीय यूनियन के लॉ मेंकर ने भी कहा है कि हमें किलर रोबोट पर प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता है, लेकिन अमेरिका ने यह साफ शब्दों में कह दिया है कि हम किलर रोबोट पर प्रतिबंध नहीं लगाएंगे क्योंकि इस पर हमने पहले ही बहुत सारा खर्च कर दिया है।

आने वाले समय में किलर रोबोट घातक साबित होंगे !

आने वाले समय में युद्ध का एक नया ही रूप देखने को मिलेगा। अभी तक जिन युद्धों को हम देखते हुए चले आ रहे हैं वह पारंपरिक वार है अर्थात हम दुश्मन को सामने से गोली मारते हुए देखते हैं। लेकिन आज अमेरिका और चीन जैसी युद्ध नीति पर आगे बढ़ रहे हैं वह पारंपरिक वार नही है। यह लोग स्पेस वॉर या किलर रोबोट की बात करते हैं।

अमेरिका और चीन इस तरह के युद्धों में विश्वास रखते हैं जिसमें इंसान का नुकसान अधिक हो और दुनिया में तबाही मची रहे जिससे उनका फायदा होता रहे। अमेरिका ने इन दिनों कुछ और भी विशेष प्रकार के वेपंस सिस्टम बनाएं है जिसमे न केवल रोबोट का इस्तेमाल किया गया है बल्कि उसमें लेजर का इस्तेमाल किया गया है।

लेजर वह एक प्रकार की सीधी लाइट है या बिना लाइट के दिखने वाली वह सिस्टम है जिसका अमेरिका ने उपयोग करके कई सारे हवाई जहाज और नाव को गिरा कर देखा है। जो आने वाले समय में बहुत ही घातक सिद्ध हो सकते हैं।

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क्या किसी देश ने किलर रोबोट का इस्तेमाल किया है ?

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि अभी UN में एक रिपोर्ट दर्ज कराई गई जिसमें यह बताया गया कि लीबिया में इस साल की शुरुआत में किसी एक देश ने आतंकियों पर हमला करने के लिए किलर रोबोट का इस्तेमाल किया था।

आर्मेनिया अजरबैजान के बीच जो नागोर्नी काराबाख जगह है वहा पर भी किलर रोबोट का डेमो ट्रायल करके देखा जा चुका है। जिसकी रिपोर्ट UN में अब पहुंच रही है। यह अपने आप में आने वाला चिंता का विषय है।

क्या भारत भी किलर रोबोट बनाने की सोच रहा है ?

दुनिया इतने बड़े बड़े वेपंस बना रही है तो इनकी कतार में भारत अभी काफी पिछले पायदान पर खड़ा है। लेकिन भारत भी किलर रोबोट बनाने के बारे में जरूर सोच रहा है।

  1. भारत ने ऑटोनॉमस वेपंस बनाने के लिए 2019 में दो एजेंसी Defence Artificial Intelligence( DAIC ) और Defense Artificial Intelligence Products Agency ( DAIPA ) का गठन किया है। लेकिन अभी तक इस में कोई महत्वपूर्ण काम नहीं हुए हैं।
  2. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI आधारित हथियारों को लेकर भारत में कुछ कदम उठाए हैं लेकिन अभी तक डिफेंस में इसका रोडमैप तैयार नहीं हो पाया है।
  3. भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन ( DRDO ) में 1986 से ही सेंटर ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आफ रोबोटिक्स ( CAIR ) है। लेकिन डिफेंस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल में कुछ खास हासिल नहीं हुआ है।
  4. रिपोर्ट के मुताबिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI आधारित हथियारो का प्रोटोटाइप तैयार हो पाया है। लेकिन सेना में इस्तेमाल की जाने वाली किलर रोबोट बनाने में अभी बहुत दूर है।

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